ब्राह्मण जन्म हुआ और माया हमारा साथी बन गए। संगम युग मे भगवान स्वयं हमे पढ़ाते हैं और पेपर भी होते है। पेपर होते हैं माया द्वारा। और हम जब पेपर पास करते हैं शक्तिशाली बनते हैं और अगले क्लास में जाते हैं । फैल हुआ तो उसी क्लास में वापस पड़ना होता है। बाबा कहते हैं जितना जितना आगे बढ़ोगे उतना उतना माया भी सर्वशक्तिमान बसन कर आती हैं। शुरू में माया से हम बहुत परेशान रहते हैं। कई बच्चों को माया बाबा का हाथ छुड़ाकर दल दल में धकेल देते हैं जिसे बाबा कहते हैं फ़ारगति देते हैं। हम पढ़ाई करते करते, योग से पावर लेते लेते माया का सामना करने का हिम्मत आ जाती है और हम अचल अडोल रहने लगे जाते है। जितना जितना हम बाबा के करीब पहुचते है बाबा पर निशचय होता है उतना ही हमारा माया से लड़ने का ताकत होता है और धीरे धीरे हम पहले से तैयार रह कर माया को चैलेंज करते हैं और उसका आने का ििइंतेजार करते हैं। माया हमारे लिए खेल बन जाती, मनोरंजन हो जाती हैं। बाबा कहते हैं यह स्थिति तभी होगा जब हम माया से घबरायेंगे नही उसको साक्षी होकर देखेंगे, उसके काबू में नही आएंगे। बाबा ने कहा बच्चे, जैसे जैसे आपकी स्टेज आगे बढ़ते जाएगी माय...