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Showing posts from July, 2020

माया के खेल को साक्षी होकर देखने वाले सदा निर्भय , मायाजीत भव

ब्राह्मण जन्म हुआ और माया हमारा साथी बन गए। संगम युग मे भगवान स्वयं हमे पढ़ाते हैं और पेपर भी होते है। पेपर होते हैं माया द्वारा। और हम जब पेपर पास करते हैं शक्तिशाली बनते हैं और अगले क्लास में जाते हैं । फैल हुआ तो उसी क्लास में वापस पड़ना होता है। बाबा कहते हैं जितना जितना आगे बढ़ोगे उतना उतना माया भी सर्वशक्तिमान बसन कर आती हैं। शुरू में माया से हम बहुत परेशान रहते हैं। कई बच्चों को माया बाबा का हाथ छुड़ाकर दल दल में धकेल देते हैं जिसे बाबा कहते हैं फ़ारगति देते हैं। हम पढ़ाई करते करते, योग से पावर लेते लेते माया का सामना करने का हिम्मत आ जाती है और हम अचल अडोल रहने लगे जाते है। जितना जितना हम बाबा के करीब पहुचते है बाबा पर निशचय होता है उतना ही हमारा माया से लड़ने का ताकत होता है और धीरे धीरे हम पहले से तैयार रह कर माया को चैलेंज करते हैं और उसका आने का ििइंतेजार करते हैं। माया हमारे लिए खेल बन जाती, मनोरंजन हो जाती हैं। बाबा कहते हैं यह स्थिति तभी होगा जब हम माया से घबरायेंगे नही उसको साक्षी होकर देखेंगे, उसके काबू में नही आएंगे। बाबा ने कहा बच्चे, जैसे जैसे आपकी स्टेज आगे बढ़ते जाएगी माय...

कान प्योर बने हैं जिससे धारणा हो सके?

बुद्धि में अच्छा या बुरा चीज़ भरने के लिए हमारे दरवाज़ा है हमारा कर्मिन्द्रिया। उस मे से एक महत्वपूर्ण कर्मिन्द्रिया हैं हमारे कान।मन बुद्धि को शुद्ध बनाना है, प्योर बनाना है तो हमारा कर्मिन्द्रिया भी प्योर होना चाहिए। 63 जन्मो से हम अज्ञात थे कौन सी बात हमे ग्रहण करना है और कौन दी बात हमारी बुद्धि को अशुद्ध बनाता है। हमे मालूम ही नही था। और हम बिना समझे मन मे कचड़ा भरते गए। नतीजा क्या हुआ । विकारी बने, नेगेटिविटी भरे। पॉजिटिव सोचना हम भूल ही गए। दिन प्रति दिन हमारे रिश्ते टूटने लगे हैं, लड़ाई झगड़े बढ़ते गए। चारो तरफ अशांति ही अशांति। मन का कुछ अच्छा सोचने का क्षमता खत्म हो गया। और हम अंदर के शांति को खो कर शांति बाहर ढूंढने लगे। अल्प समय का शांति से आत्मा को तृप्त नही हुए। सुख, पवित्रता सब कुछ खो दिया। आत्मा का स्वधर्म भूल गए। अल्प काल का सुख में डूबने लगे, विकार को सुख का साधन बना लिया और ही अशांत और दुखी हुए। तब आया कलयुग का अति का स्टेज।और हम हार खा कर भगवान को पुकारने लगे। अब भगवान आकर वापस हमे उस स्थिति तक पहुँचने का तरीका बात रहे हैं। अपना स्वधर्म में स्थित होने का रास्ता बता रहे हैं...

सदा बेहद की स्थिति में स्थित रहने वाले बंधनमुक्त,जीवन्मुक्त भव

हद में रहना माना देह को देखना और जब हम देह को देखते हैं तब हम कोई एक जने को देखते हैं जिसके साथ हमारा मोह होता है। हद में हम कभी भी पूरे विश्व का कल्याण के बारे में सोच नही सकते। किसी एक के लिए, या किसी एक परिवार या ग्रुप के लिए सोच सकते हैं। जब हम हद में होते हैं तो देह के तरफ आकर्षित होते हैं। हम जो भी करते हैं बदले में कुछ पाने के लिए ही करते हैं। हमारा सेवा निस्वार्थ नही होता है।जब हम देह को देखते हैं हम जजमेंट करते हैं पहले ।हम अपना फायदा देखते हैं। व्यक्ति का रूप, रंग, पद पोजीशन देखते हैं तब कर्म में आते हैं। रूहानियत हमे बेहद की दृष्टि दी है , सच्चाई देखने का तीसरा नेत्र दिया है जहाँ स्वयं भगवान हमे पढ़ाते हैं, जो हम भूल चुके हैं वो हमें स्मृति दिलाते हैं। और बेहद में ले जाते हैं। बेहद में हम देह को नही देखते । किसी एक के प्रति या दुनिया के आकर्षण के परायी आकर्षित नही होते। बेहद में हम किसी के अच्छा बुरा स्वभाव को या संस्कार को भी नही देखते। हम स्थूल आखो से नही देखते तीसरा नेत्र से देखते हैं और रूह को ही देखते हैं। सब रूह हैं , सब एक जैसा है, सब समान हैं। इसलिए सबके प्रति हमारी द...

जहा सर्व शक्तियां है वहा निर्विघ्न सफलता साथ हैं

बाबा सर्वशक्तिमान और हम बच्चे मास्टर सर्व शक्तिमान । सर्वशक्तिमान हमारा पिता हैं । उनके पास जो शक्तियां हैं वो हम बच्चों के पास भी हैं। पर शक्तियाँ मर्ज रूप में है। योग से बाप से शक्तियाँ ले कर हमें वो शक्तियां  इमर्ज करना है और सदा जागृत रखना है। देवी हमेशा अपने अस्त्र साथ लेकर चलते हैं। इस रूहानी यात्रा में विघ्न बहुत आएगा। 63 जन्मो से माया राज्य था हमारे ऊपर। इतना जल्दी माया हार नही मानने वाले हैं। तो हमे युद्ध के लिए एवरेडी रहना है क्यों कि माया कभी भी वार कर सकते हैं। अगर अस्त्र भूल गए तो विघ्न आएगा, आत्मा की शक्ति घट जाएगी और माया घायल कर देगी और सफलता भी बहुत दूर हो जाएगा। सिर्फ शक्ति साथ रखने से भी नही होगा हमे शक्तियों का इस्तेमाल करना भी आना चाहिए । जहां जिस शक्ति की जरूरत है वहा यूज़ करना होता है तभी सफलता इजी होगा, माया हार जाएगी। जहा सामने की शक्ति चाहिए वहा विस्तार करने से सफलता नही मिलेगी। उसके लिए परिस्थिति को अच्छा से परख कर जिस शक्ति की जरूरत है वो अप्लाई करना है साथ मे सिरकमस्टेन्स को , व्यक्ति को और समय को देखते हुए जहा मौल्ड होने की जरूरत है वहा अपने को मौल्ड भी...