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Showing posts from July, 2021

बच्चों को फरमान मिला है - मामेकम याद करो

फरमान का अर्थ है आज्ञा। जिस आज्ञा का पालन करना ही उस शब्द का शक्ति है। दुनियावी आज्ञा होता है जो inforce होता है किसी पॉवर द्वारा या कानूनी आदेश द्वारा। यहाँ है all mighty authority का फरमान जिसमे एक प्यार भरी रिश्ता समाया हुआ है। जिस फरमान में अधिकार छिपी हुई है। इस फरमान में एक राज़ है जिसका पालन करने से वर्सा प्राप्त होगा। और वो फरमान है बाप को याद करना। इस एक आज्ञा से बाबा हमे दुख की दुनिया से सुख की दुनिया मे transfer कर रहे हैं। यह वो फरमान हैं जिसमे पूरा ज्ञान समाया हुआ है। और इसी फरमान का पालन से आत्मा पवित्र बन जाएगी, सारे बंधनो से मुक्त हो जाएगी। ओम शांति

माशुक बाप आया हुआ है

दुनिया मे आशिक माशुक एक दूसरे को याद करते रहते हैं। उनकी याद होती है उनके स्वभाव संस्कार के मैचिंग से और स्टेटस से। बाबा माशुक ने मुझ गिरे हुए आशिक को चुना है। मै जो हु जैसा भी वैसे ही अपनाया। और शिक्षा देकर आप समान बना रहे हैं। माशुक के साथ जाने लायक बना रहे हैं। हर पल शिक्षा दे रहे हैं । मेरे स्थिति को ऊंचा कर अपने समान बना रहे हैं। दृष्टि, वृत्ति बदल ऊँची दृष्टि और वृत्ति में ले जा रहे है। एक समय आएगा जब बाबा के और मेरे दृष्टि बराबर हो जाएगा। दोनों सम्मुख बैठ साइलेंस में बात करेंगे । मेरे माशुक के भाषा को समझ पाऊंगी। और मै उस माशुक जैसा बन जाऊंगी, पवित्र बन साथ वापस घर जाऊंगी। ओम शांति 

एक एक ज्ञान रतन लाखों रुपयों का है

1) कोई भी रतन का वैल्यू 4 चीज़ों से परखा जाता है।    Clarity, colour, cut, carot weight 2) जितना ज्ञान की clarity है उतना ज्ञान का value। जितना ज्ञान की गहराई में जाकर समझेंगे उसका उपयोग कर कुछ नया अनुभव करेंगे उतना value ज्यादा होगा। 3) जितना ज्ञान colorful होगा माना भिन्न भिन्न ड्रामा के सीन में use होगा चाहे माया को जीतने के लिए या किसी को माया के पंजे से निकालने के लिए, ड्रामा को समझने के लिए उतना valuable है। 4) जितना जितना ज्ञान को टुकड़ो में, fine cutting करके एक एक बाबा के शब्द को गहराई से समझेंगे उतना valuable होगा। 5) जितना जितना ज्ञान का मनन चिंतन से उसका मूल्य को जानेंगे और अनुभवीमूर्त बनेंगे उतना एक एक रतन का वजन होगा।

अशरीरी बनो अर्थात डेड साइलेंस

डेड माना मरना। जब मनुष्य मरते हैं, आत्मा शरीर से अलग या निकल जाती हैं। शरीर न बोल सकता, न देख सकता, न सुन सकता न ही शरीर कोई हरकत करेगा। क्यों कि आत्मा जो शरीर द्वारा सब कुछ कर रही थी अब नही है। पर क्या आत्मा उस शरीर से निकलते ही डेड साइलेंस का अनुभव करती हैं। नही क्यों कि आत्मा अब भी शुक्ष्म शरीर मे है। शुक्ष्म शरीर द्वारा देख सुन सकती है। और अगर सुन, बोल देख सकती है तो डेड साइलेंस का अनुभव नही होगा। यहा यह समझ आ रहा है कि डेड साइलेंस का अनुभव सिर्फ और सिर्फ परमधाम मे ही हो सकती हैं। क्यों कि वहाँ न तो शरीर है न ही शरीर का स्मृति है। न ही परमधाम में उस समय exist करने का अनुभव है। एकदम डेड। क्यों की आत्मा शरीर द्वारा ही अनुभव करती है। पर क्या साइलेंस का अनुभव है आत्मा को। अगर है तो डेड कैसे। मुझे लगता है डेड साइलेंस का अनुभव शरीर मे रहते हुए जब हम बुद्धि द्वारा परमधाम में अशरीरी बन बैठेंगे तो डेड साइलेंस का अनुभव होगा। उसके लिए एकाग्रता का शक्ति जरूरी है। जितना एकाग्र होंगे उतना अशरीरी स्तिथि का अनुभव होगा। और उतना ही डेड साइलेंस का अनुभव होगा। क्यों कि हम इतना एकाग्र होंगे जो हमे पता ...

नशा के पॉइंट्स

1) मै बाबा के आदि और अनादि रचना हूँ। 2) मैं कल्प वृक्ष के जड़ में बीज के साथ बैठने वाली आत्मा हूँ। 3) मैं परमात्म डायरेक्ट रचना हूँ। 4) मैं गोल्डन ऐज और सिल्वर ऐज मे पार्ट बजाने वाली आत्मा हूँ। 5) मैं सतोप्रधान प्रकृति में सतोप्रधान अवस्था मे रहने वाली आत्मा हूँ। 6) मेरा डायरेक्ट बीज के साथ संबंध है। 7) मैं शिववंशी हूँ।

Harmony can be created not by competition but by cooperation

We can have a look on the periodic table of elements in chemistry. The atoms alone are imbalanced and wobbling. In order to create a balance these elements need to combine with another element and are interdependent. When these elements after getting combined gets separated loss of energy takes place. For example a water molecule H2O. When hydrogen and oxygen gets separated there is loss of energy. On the other hand, noble gases are noble . They remain balanced when alone. And when they combine with another noble gas they are still independent and a laser beam is produced through photons in the molecule which spreads energy in the atmosphere.