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Showing posts from March, 2021

Harmony can be created not by competition but by cooperation

We can have a look on the periodic table of elements in chemistry. The atoms alone are imbalanced and wobbling. In order to create a balance these elements need to combine with another element and are interdependent. When these elements after getting combined gets separated loss of energy takes place. For example a water molecule H2O. When hydrogen and oxygen gets separated there is loss of energy. On the other hand, noble gases are noble . They remain balanced even when alone. And when they combine with another noble gas they are still independent . They do not interact. When electricity is passed through  photons in the gas a lazer beam is formed which spreads energy in the atmosphere called the neon glow.  Similarly Baba is making us stable by meditation and knowledge. We are becoming alike lotus flower untouched and unaffected by the negative environmental signals or surrounding chaos just as noble gases which remains inert. This will occur only when our inner powers are a...

शिवशक्ति

शिव माना कल्याण, मंगल शक्ति माना ताकत, पॉवर मै शिवशक्ति हूँ माना- मै कल्याण करने का शक्ति हूँ। कल्याण किसी एक का नही पूरे विश्व का । दोस्ती या दुश्मनी का भाव न रख कर। सब मेरे अपने है। भाई भाई का दृष्टि रख। और पूरे विश्व का कल्याण करने से पहले स्वयं का कल्याण करना है। और स्वयं का कल्याण तभी होगा जब शक्ति होगा। स्वयं का कल्याण करने से शक्ति भी मिलेगा क्यों कि सारे शक्तियां सैयम में होंगे। उसी शक्ति से सबका कल्याण कर सकेंगे। अतः शिव के बिना शक्ति नही और शक्ति के बिना शिव नही। शिवशक्ति combined। तभी जब शक्तियां सैयम में है। ओम शांति

दिव्यबुद्धि दाता

दिव्य माना divine, अलौकिक, जो लौकिक नही, अति सुंदर जिस सुंदरता का स्थूल वर्णन नही हो सकता, भव्य, कुछ अलग जो सुप्रीम ही दे सकते है। इस दुनियावी बातों से परे। बुद्धि माना समझ, अकल, intelligence। एक समझ उस लेवल तक कि हम भगवान को ओर उनके महावाक्य के गुह्यता  को जान सके। और उनके श्रीमत पर चल अनुभव कर सके। एक समझ जिससे यह समझ आ जाये कि आज तक हम अज्ञान के अंधेरे में थे। जब बुद्धि नासमझ होते है तो बुद्धू कहा जाता है। बाबा बुद्धि को ही क्यों दिव्य बनाया? हमारा ब्रेन का surface area सबसे ज्यादा है ओर उसी कारण मनुष्य को सबसे ज्यादा बुद्धिमान कहा गया है। और जहा surface area ज्यादा होता है वहा receptors भी ज्यादा होता है और हम  अनुभूति भी ज्यादा कर सकते है। छोटा सा cell से पूरा ब्रह्मांड तक फैल सकता है। हमारे अंदर का evolution हो रहा है।बाबा भी हमारी बुद्धि को विशाल बनाने और बेहद में ले जाने के लिए कहा है। जिससे हमारा बुद्धि तिखनं हो जाएगा और singularity के तरफ हम शिफ्ट होते जाएंगे। आत्मा जो इन स्थूल आँखों से देखते है वह बुद्धि में picture बनता है और उसका अनुभव मन करता है जिससे अच्छा या बु...

जैसे कहा जाता है शंकर प्रेरक है, बॉम्ब्स आदि बनवाये है, वैसे 5 विकारों रूपी रावण प्रेरक है मनुष्य को पतित बनाने का , तब तो पुकारते है पतित पावन आओ।

जैसे कि हमने inner evolution से जाना कि environmental signal के ऊपर हमारा perceptions depend करता है। और उसके मुताबिक हमारे cells में परिवर्तन आता है। यहा शंकर और रावण हमारे perceptions है जो environmental signals के मुताबिक बदलते रहते है। प्रेरक माना motivate करना। शंकर प्रेरक है बॉम्ब्स आदि बनवाने का। यहा शंकर है  perception  जो  स्थिति के हिसाब से scientist का   बदलते है, प्रेरक बनते है बॉम्ब्स आदि बनाने का। Environmental signal का एक wave create होता है जो नेगेटिव या पॉजिटिव हो सकता है और फिर perception का wave create होता है पॉजिटिव या नेगेटिव। जब दो पॉजिटिव या दो नेगेटिव wave मिलते है तो एक बड़ा wave बनता है , coherence ( यह होता है आत्मा के सारे शक्तियां जो स्थिति के हिसाब से पॉजिटिव या नेगेटिव) है और वो wave scientist का स्थिति के हिसाब से touch होता है। और बॉम्ब्स बनता है। ठीक वैसे ही रावण हमारा perception है जो environmental signal से प्रभावित होते है। और  हमारे स्थिति अनुसार हमे 5 विकार में ले जाने का प्रेरक बनते है। हम आत्माओ का अगर ज्ञान योग का ...