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Showing posts from September, 2021

in akhon se jo kuchh bhi dekhte ho sab bhul jao

अभी हमें बाबा ने gyan दिया है हमारा तीसरा नेत्र खुला और हमें अब उसी आँख से देखना है I तो जाहिर है, स्थूल आखों को बंद करना है I पर  akhen बंद होगा तो कैसे होगा I इसलिए भूलना जरूरी है I अगर कहे भूलना क्यूँ है क्यूँ की वह सत्य है नहीं I और जो सत्य नहीं उससे कभी आगे नहीं बढ़ सकते I storage खाली नहीं होगा तो नया अंदर jayega नहीं  space नहीं होगा. I और नया कुछ डालने जाएंगे पुराना के साथ mixturity ho जाएगा. I दिखता क्या है.  1) आकर्षण करने वाली देह, देह के सम्बंध, वस्तु. I  2) अन्य atmao का संस्कार, अवगुण  3) drama ke scenes पुराने nazar से  4) बीती हुई ड्रामा scenes को और future scenes जो बुद्धि में आता है  5) हर रोज का पुराना perception को. I