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Showing posts from August, 2022

aj ki murli

जो आत्मायें जा नहीं सकती हैं उनको योग से पवित्र बना रहे हैं। इसको कहा जाता है नॉलेज। रूह को नॉलेज मिलती है।  कहते हैं मन में संकल्प विकल्प न आयें। बाप कहते हैं यह तो जरूर आयेंगे। मामेकम् याद करो।  कहते हैं मन में संकल्प विकल्प न आयें। बाप कहते हैं यह तो जरूर आयेंगे। मामेकम् याद करो।  रावण के गले का हार पहले-पहले देवी-देवता धर्म वाले बनते हैं फिर और धर्म वाले आयेंगे, वह भी रावण के गले का हार बनेंगे। अन्त में सभी रावण के गले का हार बन जाते हैं। यह ड्रामा का खेल ऐसा बना हुआ है जो सिवाए बाप के और कोई समझा न सके।  बरोबर हम असुल में अपने बाप के गले की माला हैं फिर बाबा हमको सूर्यवंशी, चन्द्रवंशी बनाते हैं।  दैवीगुण धारण करना कितनी बड़ी सब्जेक्ट है। सारे चक्र का राज़ भी समझाना है। कोई में गुण कम हैं, मुरली अच्छी चलाते हैं। नम्बरवार तो होते ही हैं ना।  जो पास होते हैं वह गले का हार बनते हैं। बाप तो परफेक्ट है, उन जैसा परफेक्ट कोई हो नहीं सकता।  पहला धर्म देवी-देवता है जो बाप स्थापन करते हैं। अब सबसे गिरा हुआ है तो जरूर उनको मदद करेंगे। जब लड़ाई शुरू होगी तो खु...

दिल से दिल तक

1) सिर्फ यह सभा नहीं है लेकिन चारों ओर के स्नेही सहयोगी बच्चों का छोटा सा ब्राह्मण परिवार अति प्यारा और न्यारा परिवार, अलौकिक परिवार, चित्र में होते विचित्र अनोखा परिवार सामने है।  2) चारों ओर के सर्व बच्चों के स्नेह के, दिल के गीत बाप-दादा ने सुने।  3) सभी के दिल में आज विशेष प्यार के सागर बापदादा का प्रेम स्वरूप प्रत्यक्ष रूप में नयनों के सामने रहा।  4) कभी भी अपना स्नेही मूर्त, स्नेह की सीरत, स्नेही व्यवहार, स्नेह के सम्पर्क-सम्बन्ध को छोड़ना मत, भूलना मत। चाहे कोई व्यक्ति, चाहे प्रकृति, चाहे माया कैसा भी विकराल रूप, ज्वाला रूप धारण कर सामने आये लेकिन विकराल ज्वाला रूप को सदा स्नेह के शीतलता द्वारा परिवर्तन करते रहना।  5) सदा स्नेह की दृष्टि, स्नेह की वृत्ति, स्नेहमयी कृति द्वारा स्नेही सृष्टि बनानी है।  6) कोई स्नेह नहीं भी दे लेकिन आप मास्टर स्नेह स्वरूप आत्मायें दाता बन रूहानी स्नेह देते चलो। 7) आज की जीव आत्मायें स्नेह अर्थात् सच्चे प्यार की प्यासी हैं। स्नेह की एक घड़ी अर्थात् एक बूँद की प्यासी है। सिवाए सच्चे स्नेह के कारण परेशान हो भटक रहे हैं। सच्चे र...