आज बाबा ने कहा तुम्हे अपने आप को राज तिलक देना है। दुनिया मे जब महाराजा का राज तिलक होता हैं तो बहुत प्रजा इकट्ठा हो जाता हैं। भरि सभा मे राज तिलक किया जाता हैं। वाह वाह होता हैं। हमारा राज तिलक है रूहानी, गुप्त। स्थूल में राज तिलक होगा सतयुग में नम्बरवार पुरुषार्थ अनुसार। पर संगम युग मे हम अपने आपको तिलक देने का अधिकार मिला हुआ है बाबा से। संगम युग मे हम पैर रखते ही आत्मा परिवर्तन का पुरुषार्थ करते हैं। और धीरे धीरे हमारी चढ़ती कला होता है। एक एक अवगुण को मर्ज करते हैं और गुणों को इमर्ज करते हैं। साथ मे बाबा भी हमारे गुणों का माला सिमरन करते हैं। बाबा कहते हैं अटेंशन रख एक एक गुणों को इमर्ज करो। विशेष करके सेवा में अपना चेहरा दर्पण में दिखता है और उसी समय हमें विशेष अटेंशन देना है। बाबा हमे विश्वकल्याणकारी का टाइटल दिया है साथ मे यह भी कहा है कि बच्चे तुम उद्धारमूर्त आधारमूर्त हो । विश्व को परिवर्तन करने के लिए हमे पहले स्वयं को परिवर्तन करना है । हमारा परिवर्तन ही विश्व को आकर्षित करेगा। और हम और बाबा दोनों प्रत्यक्ष होंगे। जैसे लौकिक में कोई बच्चा अच्छा या बुरा चलन होता हैं तो न...