फरिश्ता वो है जो हल्का रहता हैं, कोई भी परिस्थिति या पेपर उसे हिला नही सकता। फरिश्ता सफेद प्रकाश के काया होते है जो हमेशा उड़ते रहते है। उसका पैर जमीन पर नही होता। देह रूपी मिट्टी से ऊपर रहते है। अक्सर देखा गया है छोटी छोटी बातों पर हमें फीलिंग आ जाती है। सारा दिन मुंझे हुए रहते व्यर्थ संकल्प चलते रहते है। और सारे दिन एनालिसिस करने के बाद हम कहते है उसे कभी भी माफ नही कर सकती। अपने अंदर सप्रेस करके सालो साल दर्द को भोगते है। बाबा ने हमे सिखाया है फुल स्टॉप लगाना। कर्मिन्द्रियों का राजा बनना राजयोग का अभ्यास से। पर जो चीज़ हमने 63 जन्मो तक अभ्यास किया वह चेंज करने में समय लग रहा है। मेहनत भी है । अपने संकल्पों का तूफान से ही घबरा जाते है। जब कि यह समझ है कि अच्छे चीज़ भरेंगे तो गंदगी तो निकलेगा ही। देह भान और देह अभिमान के संस्कार अभी भी इमर्ज है। इसलिए हम फीलिंग में आ जाते है। देह रूपी मिट्टी से ही खेलते रहते है। हल्का नही रह पाते। इतने जन्मो से हम या तो अच्छा को भोगा या बुरा। अब इससे निकलने के लिए दोनों अच्छा और बुरा को नही भोगने के अभ्यास करना है। इसी अभ्यास से हम हल्के होते जाएंगे...