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Showing posts from December, 2020

realisation - अतीन्द्रिय सुख मिलने से हम इन्द्रिय सुख को सहज त्याग देते है।

2 दिन पहले एक छोटा सा पेपर आया था और उस पेपर में मैं फैल हो गयी। पेपर था डिस्पेंसरी का timing के ऊपर।अधिकार से जवाब दिया था पर डिसरीगर्ड किया और मेरा स्थिति भी खराब हो गया। स्थिति खराब होते गलती भी खूब किया क्यों कि बुद्धि में ताला लग गया था। उस स्थिति से निकलने में मुझे पूरे एक दिन लगा। फिर हमने उस घटना का चिंतन किया कहा मेरी गलती थी और मुझे कहा सावधान होना जरूरी है। जब मनन किया तो मैने देखा कि पेपर डिस्पेंसरी के बहार भी आता है पर वहा न फील होता न ही react करते है। easily सहन कर लेते है। checking करने पर पता चला कि मेरे सेवा स्थान के आत्माओं के साथ अटैचमेंट था। तुररन्त मैं अपने ऊपर काम करने लगी। खुद को इस परिवार से डिटैच किया और एकांत कर दिया। अंतर्मुखी हो गयी। जहा सेवा की जरूरत है वहा बात किया और फिर एकांत। अचानक मेरे में चेंज देख सेवा साथी असंतुष्ट भी हुए। मै थोड़ा confused थी - मैं जो कर रही हूं वह राइट या रॉंग। अमृतवेला बाबा के झोपड़ी में जा कर बाबा को कहा- बाबा मै जो हु जैसा भी हु आपका हु। मुझे राइट रॉंग का परख नही आप मुझे गाइड करना। बाबा ने झट कहा बच्ची तुम चिंता मत करो मैं बैठा ह...

जो स्नेही को पसंद है वही स्नेह करने वाले को पसंद हो

हमारा जिससे स्नेह है उसका हर पसन्द न पसन्द का ध्यान रखते है। हमे कोई चीज़ अच्छी लगती है फिर भी उसका पसंद को महत्व देते है। कुछ करने से पहले हमेशा वेरीफाई करते है क्या उसको पसंद आएगा? इतना त्याग करते है। पर नतीजा क्या निकलता है जो देहधारी हमारा इतना स्नेही है , जिसके लिए हम इतना त्याग करते है क्या वो हमारा ध्यान रखता है या समय आने पर धोखा देता है स्वार्थ देखता है। ऐसा अनुभव बहुतो को इस कलयुगी दुनिया मे हुआ भी होगा। फिर भी हमारा बुद्धि का ताला नही खुलता है। हम उस धोकेबाज के पीछे हर पल चिपके रहते है। और जो हमारा असली ध्यान रखनेवाला है उसे भूल जाते है। अब स्वयं शिव साजन आया हुआ है और हमारा बुद्धि का ताला खोल दिया है। पर क्या ताला पूरी तरह खुला है। या अभी भी उस निराकार प्रति निश्चय काम है। या अभी भी उसका निःस्वार्थ प्यार का अनुभव नही हुआ । क्या हमने उसको स्नेही माना। अगर माना है तो हर बात को वेरीफाई करते है। जो स्नेही को पसंद वो हमारा पसंद है। या खुद के पसंद पर ध्यान है। और उसको किनारा कर दिया। दिखता तो है नही। अगर शिव साजन सही में हमारा स्नेही है तो हमारा चलना, खाना, पीना, रहना स्नेही के दि...

इन्द्रिय सुख से क्या क्या गवाते है

1) अतीन्द्रिय सुख को गवाते है। 2) बाबा का साथ को गवाते है। 3) अपनी श्रेष्ठ स्थिति को गवाते है। 4) श्रेष्ठ संगम युग का समय को गवाते है। 5) संकल्प शक्ति को गवाते है। 6) आत्मिक बल गवाते है। 7) पास्ट को सुंदर बनाने का शुअवसर को गवाते है। 8) सतयुग के तरफ शिफ्ट होने का एक मौका को गवाते है। 9) फीचर से फ्यूचर को दिखाने का मौका गवाते है। 10) अपने स्टोरी से दूसरों को पाठ पढ़ाने का मौका गवाते है। 11) बाप समान बनने का मौका गवाते है। 12) भाई भाई का रिलेशन को गवाते है। ओम शांति

पास्ट, प्रेजेंट और फ्यूचर का खेल

पास्ट को सदा पास विथ ऑनर होकर के पास करना। बाबा कहते है पास्ट तो पास्ट होना ही है पर वो पास कैसे किया वो देखना है। पास विथ ऑनर बन पास किया? हमे चेक करना है बीती को तो बीती किया पर बीती को ऐसे बीती किया जो बीती को स्मृति में लाते वाह वाह का बोल निकले। हमारी बीती हुई स्टोरी से अन्य पाठ पढ़े। हमारी बीती यादगार स्वरूप बन जाये कीर्तन गाते रहे। हम सब का पास्ट दर्दनाक है जो याद आते ही हम दर्द में चले जाते है। बाबा ने हमे ज्ञान दिया है और उस ज्ञान के मुताबिक इस बेहद के ड्रामा में हर सीन कल्याणकारी है।पर हमें जीवन के हर सीन को अटेंशन के साथ पास करना है। पास विथ ऑनर हो पास करना है। फैल होकर नही ताकि बीतने के बाद पछतावा न हो। प्रेजेंट- बाबा कहते है प्रेजेंट को ऐसे प्रैक्टिकल में लाओ जो हर प्रेजेंट घड़ी वा संकल्प से आप विशेष आत्माओं द्वारा कोई न कोई प्रेजेंट प्राप्त हो। सिर्फ एक सेकण्ड के स्नेह की दृष्टि, स्नेह का सहयोग, स्नेह की भावना, मीठे बोल, दिल के श्रेष्ठ संकल्प का साथ- यही प्रेजेंट्स बहुत है। यह स्टॉक जमा करना है। फ्यूचर- फ्यूचर को अपने फीचर्स से प्रत्यक्ष करना है। स्मृति में लाना है फ्यूचर म...

पुराना संकल्प और संस्कार को विदाई

बहुत दिन बीत चुके पुराना संकल्प और संस्कार को पालते हुए । उससे फायदा तो हो नही रहा उल्टा नुक्सान ही हो रहा है। बाबा कहते है अब नए साल में सारा पुराना संकल्प और संस्कार को त्याग दो और शक्तिशाली बन जाओ। और नए उमंग- उत्साह से उड़ने का संकल्प करना है। बाबा हमें पहले से ही मुबारक दे रहे है। हर बार संकल्प करते है और तोड़ते हैं। अब इस नए वर्ष में कैसे संकल्प करें जो कमजोर न पड़े और दृढ़ता के साथ संकल्प पर अडिग रहे। 1) मुझे बाबा के नज़दीक आत्मा बनना है उसके लिए मुझे बाबा जैसा बनना है। 2) देहभान के सारे संकल्पो पर अटेंशन का पहरा लगाना है। 3) पुराना संकल्प आते ही मन को समझा कर शुद्ध संकल्पो में बदलना है। 4) परिस्थिति में अचल अडोल रहने के लिए अपने को पहले से ही तैयार रखना है। 5) एकदम अंतर्मुखी का अभ्यास करना है। ताकि परिस्थिति आते ही समय पर अंतर्मुखी हो साक्षी हो अपने संकल्पो को देख सके। 6) मेरे में जो कमजोरी है , पुराना संस्कार है उस पर स्पेशल अटेंशन रखना है। 7) परिस्थिति आते ही वृत्ति लेवल पर काम कर संकल्पो को रोकना है। और उसके लिए वृत्ति चेकिंग के अभयास दिन भर में करना है। 8) अपने को इतना बिजी रखना...

active, accurate and attractive कैसे बने

Active- जिस समय जो करना है या जो संकल्प किया करने के लिए वो करेंगे। बाबा कहते है ना अब नही तो कब नही। ऐसे नही काल से करेंगे या एक दो दिन करने के बाद वापस पहले वाली आदत में आ जाये। दृढ़ संकल्प किया और तुरंत किया। पुराना संस्कार के वश नही होंगे। बाबा कहते है जो active होते है वह जिस समय जैसे अपने को बनाने चाहे , चलाना चाहे वह चला सकते है वा ऐसा ही रूप धारण कर सकते है। यह है मुख्य एक्टर की एक विशेषता। Accurate- हर कर्म,संकल्प और बोल accurate होगा माना श्रीमत अनुसार। बाबा ने हमें मनसा का श्रीमत दिया। क्या सोचना है। पर साक्षी हो कर जब हम अपने आप को देखते है तो हमारे में कौन सा विकार ज्यादा है वह पता चलता है। और परिस्थिति अनुसार वह हमारे कंट्रोल के बाहर हो जाता है। पुराना संस्कार , हिसाब किताब सब कार्य करता है। बाबा ने जो नियम, मर्यादा और डायरेक्शन दिया है उन सभी मे एक्यूरेट और एक्टिव। रोज़ अमृतवेला यह सारे श्रीमत को रिविज़न करना औऱ जो गलती बार बार होता है उसको सुधारने के लिए सेवा स्थान में जाने से पहले खुद को याद दिलाना है सारे श्रीमत। तब एक्यूरेट बन सकते है। Attractive- देह से नही । अक्सर हम ...

एकदम अंतर्मुखी

एकदम अंतर्मुखी माना तुरंत, फौरन अंतर्मुखी। कोई भी परिस्थिति आता है तुरंत अंतर्मुखी होना । इसमें समय लगेगा तो हलचल में आने का समय मिल जाएगा। एकदम अंतर्मुखी - परिस्थिति आया और हम अंतर्मुखी का गुफा में घुस गए। स्वयं को चेकिंग करने में बिजी और साथ ही बाबा से कनेक्टेड रहना है। जब स्वयं को चेक करेंगे बुद्धि दुसरो के तरफ नही जाएगा परचिन्तन परदर्शन नही होगा। जब यह अभ्यास हमारा रहेगा तो हम हर परिस्थिति में अचल अडोल रह सकेंगे। तो एकदम अंतर्मुखी होने के लिए क्या करे। 1) मन को affirmation दे कि मुझे हर परिस्थिति में एकदम अंतर्मुखी होने का practice करेंगे। 2) कोई भी परिस्थिति को उन्नति का पेपर accept करना है। 3) जहा परिस्थिति आने का संभावना है माना बार बार आता है वहा चेक करना जरूरत है हमारा कोई अटैचमेंट तो नही है। वहा detached होने का पुरुषार्थ करना है। 4) किसी से कोई expectations नही रखना है उसके लिए मन को तैयार करना है। 5) किसी से compare नही करना है। हर आत्मा का अपना अपना भाग्य और पार्ट है। 6) भले परिस्थिति आया और मन में हलचल शुरू हो पर तुरंत अंतर्मुखी हो साक्षी हो अपना संकल्पो को देखना है। 7) ज...

अपने को आत्मा निश्चय कर बैठो और बाप को याद करो तो तुम्हारे सब दुःख दूर हो जाएंगे।

इतने जन्मो से असत्य का पथ पर चलने कारण नीचे गिरते गिरते दुखी हो पड़े हैं। और दुःख को भोगने का दुखी हो रोने का संस्कार बन गया है। छोटी छोटी बातों में हिल जाते हैं डिस्टर्ब हो जाते हैं, गिर पड़ते हैं। हमारी बैटरी डाउन हो जाता हैं और परिस्थिति के ऊपर परिस्थिति फॉलो करते रहे और हम बंधन मुक्त के जगह बंधन युक्त हो गए। इस दुःख से निकलने के लिए विकार से सुख लेने की कोशिश की, साधनों का इस्तेमाल किया, अल्प काल का सुख का सहारा लेने लगे। पर कभी दुःख कभी सुख भोगते रहे , अनुभव करते रहे, संस्कार बन गया। लंबे समय का ये अभ्यास होने कारण संगमयुग में वही संस्कार प्रबल हैं। घड़ी घड़ी छोटी छोटी बातों में इफ़ेक्ट पड़ जाता हैं और  डिफेक्टिव बन गए । अभी भी हमारे अंदर शक्ति की कमी होने कारण रो पड़ते हैं। माया का दरवाजा और खोल देते हैं। कमजोर पड़ने कारण राइट रॉंग परखने का शक्ति और निर्णय लेने का शक्ति नही रहता हैं। हमारा हर कार्य रॉंग होने लगता हैं।  बाबा हमें इस दुःख से निकलने का युक्ति बता रहे हैं। बाबा ने कहा अपने को आत्मा निश्चय कर बैठो पहले। हम अभी देहभान में हैं और इसी कारण से दुखी हैं। आत्मा है सुख स्वर...