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Showing posts from October, 2020

निराकारी अवस्था का अटेंशन कम होने के कारण मुख्य विकार देह - अभिमान, काम और क्रोध - इन तीनो का वार समय प्रति समय होते रहता है।

हमारा पहला पाठ निराकारी स्थिति में स्थित होना। यह मासी का घर नही है। बहुत अटेंशन और मेहनत चाहिए। दृढ़ता पूर्वक प्रैक्टिस रखने का सोचते है और झट बुद्धि से फिसल जाती है। 63 जन्मो से इतना बड़ा शरीर को देखते आये है, वर्णन उसी का किया, श्रृंगार उसी का किया , हर कर्म में उसी को यूज़ किया, इतना लगाओ रहा इस शरीर से अब बाबा आकर कहते है तुम तो आत्मा हो एक बिंदु। अब बिंदु बन जाओ। आदत पड़ी हुई है बड़ी चीज़े देखने का। एक तरफ हाथी और साथ मे चींटी। क्या दिखेगा हमे हाथी न। पेपर में नज़र हमारा झट कहा जाता है बड़े बड़े हैडलाइन पर। अक्सर देखा जाता है अखबार वाले हैडलाइन आकर्षित कर देते है पर असलियत जो अंदर छोटे अक्षर में होते है वो है। ठीक वैसे ही बाहर जो इतना बड़ा शरीर दिखता है वो असली नही पर जो निराकार दिखता नही अति शुक्ष्म वो असली है। वही हम है। 63 जन्मो का प्रैक्टिस अब बाबा कहते है उसको भूलो और एक जन्म में आत्मा बन जाओ। तो कितना मेहनत करना है हमे। बाबा कहते धुन लग जाना चाहिए। जब यह प्रैक्टिस होगा, आत्मा का गुण इमर्ज होगा। खुद प्रैक्टिस करने वाले का भी और जिसे आत्मा देखते है उसका भी। रूहानियत का नेचुरल नेचर बन ज...

वृत्ति में विल पावर न होने के कारण वृत्ति एक रस न हो चंचल होती है।

वृत्ति होता है हमारे intense feelings जो सेकंड में आ कर हम से कर्म करा देता है। वृत्ति के तले पर काम करने के लिए अति शुक्ष्म चेकिंग की जरूरत है। साथ मे विल पावर की भी आवश्यकता है। जब तक विल पावर नही होगा हम वृत्ति को बदल नही सकते। घड़ी घड़ी ऊपर नीचे होते रहेगा। कभी पुराना संस्कार निकल आएगा कभी देवी गुण। एक रस नही होगा। बाबा कहते है लंबे समय का अभ्यास ही अंत समय मे सफलता दिलाते है। संगम युग मे हम बाबा के बच्चे अपना परिवर्तन कर विश्व का परिवर्तन करने आये है। और अपना परिवर्तन सिर्फ पॉवरफुल विल पावर से ही हो सकता है। वृत्ति जब तक चंचल होगा तब तक परिवर्तन नही हो सकता है। बुद्धि को स्थिर करने के लिए बाबा ने हमे विधि बताया है जैसे ड्रिल जिससे हमारा एकाग्रता बढ़ जाएगा और एक रस स्थिति को पा लेंगे।  ओम शांति

दृष्टि में दिव्यता वा अलौकिकता यथा शक्ति नम्बरवार आई है

किसी के तरफ नज़र जब जाती है पहले हमारी नज़र आँखों पर पड़ती है और यह दृष्टि से ही उस आत्मा का मन की भावना को हम जान जाते है। यह सिर्फ ज्ञानी आत्मा के लिए नही कहते है पर अज्ञानी आत्मा भी आँखों का इशारा समझ जाते है। और यहाँ भगवान ने दृष्टि से सृष्टि बदल दिया है। दृष्टि के साथ आत्मा का डायरेक्ट कनेक्शन है और आत्मा का भाव दृष्टि से क्लियर पता चलता है। दृष्टि से अपना वृत्ति एक दूसरे को एहसास करा सकते है। 63 जन्मो से हमारी दृष्टि देह और देह के पदार्थ के तरफ आकर्षित हुए। और वो इतना लंबा अभ्यास से आटोमेटिक मोड पर चला गया। न चाहते हुए भी हमारी दृष्टि देह के तरफ आकर्षित होते है।अब बाबा आये है और हमे बताया हमारी असलियत। बाबा कह रहे हैं अपने को आत्मा समझो और परमात्मा को याद करो। कहा इतना बड़ा देह और अति सूक्ष्म आत्मा जो आंखों से दिखता ही नही। आत्मा को अनुभव करना है और आत्मा समझना है। कितना मेहनत है । ब्रह्मा बाबा को भी मेहनत लगा था। घड़ी घड़ी भूल जाते है। जो दिखता नही वो देखना है । पर बाबा कहते है बच्चें तुम चिंता क्यों करते हो मै बैठा हूँ न। हमे तो सिर्फ हिम्मत का एक कदम बढ़ाना है और बाबा हमे हज़ार कदम का...

Greatest magnet

A magnet is an object or material that produces a magnetic field. This magnetic field is invisible but is responsible for the most notable property of a magnet, a force that pulls on other ferromagnetic materials, such as iron, and attracts or repels other magnets. Here Shiv Baba is a powerful magnet who attracts souls. It is because of this greatest attraction that the brahmin souls reached Baba's home and accepted knowledge. Once we are in Baba's home, the greatest magnet keeps attracting the souls. But as the souls are rusted with vices our attraction towards Baba is numberwar . But still our daily practice of connecting with Baba clears of the rust as kerosene clears rust on needles. Gradually as our intellect gets clean our attraction towards Baba gets intensified and we get focused on Him. Our concentration increases. We start stepping towards the golden age . Changes occur in our behavior and immortal happiness and purity emerges. Just one greatest magnet converts into v...

मुख्य 7 कमजोरियां ( पुरुषार्थियों के पुरुषार्थ की नम्बरवार रिजल्ट)

1) एक तो स्मृति में समर्थी नही रही हैं।  2) दृष्टि में दिव्यता वा अलौकिकता यथा शक्ति नम्बरवार आई हुई हैं। 3) वृत्ति में विल पावर न होने का कारण वृत्ति एक रस न हो , चंचल होती है। 4) निराकारी अवस्था का अटेंशन कम होने के कारण मुख्य विकार देह-अभिमान, काम और क्रोध- इन तीनो का वार समय प्रति  समय होता रहता है। 5) संगठन में रहते वा संपर्क में आते वायुमंडल, वाइब्रेशन अपना इम्प्रैशन डालता है। 6) अव्यक्त फ़रिश्तेपन की स्थिति कम होने कारण अच्छी वा बुरी बातों की फीलिंग आने से फेल हो जाते है। 7) अपनी याद की यात्रा से संतुष्ट कम। बापदादा 25/8/71

दो बातें

1) डबल कोर्स - जनरल/ पर्सनल। 2) डबल ताजधारी - लाइट अर्थात प्यूरिटी/ माइट। 3) डबल तख्त - बापदादा का दिल रूपी तख्त / अचल, अडोल एकरस स्थिति का तख्त। 4) नॉलेज की दो बातें - अल्फ और बे और रचयिता और रचना। 5) डबल कर्तव्य - विनाश- व्यर्थ संकल्पों वा विकल्पों के / स्थापना। 6) डबल स्थापना- सर्विस द्वारा अपनी राजधानी की रचना / बुद्धि में शुद्ध संकल्पों की रचना। 7) डबल पोजीशन - डीटी / गाडली पोजीशन। 8) डबल निशाना - डबल नशा- निराकारी निशाना / निर्विकारी स्टेज ( साकारी) 9) डबल प्राप्ति- अतीन्द्रिय सुख की प्राप्ति- बाप और वर्सा / फुल नॉलेज। 10) डबल- एक बाप और दूसरा मैं कंबाइंड। 11) डबल निशानी फुल की- फील नही करेंगे और फेल नही होंगे। 12) डबल पाठ-मुख से पढ़ना/ सिखलाना एक्ट से। 13) डबल तिलकधारी- आत्मिक स्मृति और स्वरूप का / निशचय का - हम विजयी रतन हैं। बापदादा- 20/8/71

विश्व कल्याणकारी की ऊंची स्टेज पर स्थित रह विनाश लीला को देखने वाले साक्षी दृष्टा भव

विश्व कल्याणकारी माना पूरे विश्व को एक ही दृष्टि से देखना एक ही समान देखना। किसी के प्रति स्नेह ज्यादा कम न हो। सब के प्रति एक समान रहम की भावना। किसी एक के प्रति अगर मोह हो तो सब का कल्याण नही कर सकते। किसी के प्रति ज्यादा किसी के प्रति कम होगा। ऐसे स्थिति में हमारे स्थिति भी ऊपर नीचे हो सकता हैं। विनाश के समय पर सीन बहुत भयंकर होगी  । उसको देखने का हिम्मत तभी होगा जब हर एक को आत्मा देखेंगे। अपने आँखों के सामने अपने देह के संबंधों को तकलीफ होगा , प्रकृति का हलचल जोड़ से होगा, पुराना संस्कार अंतिम पेपर के रूप में आएंगे। यह सब कुछ देखने के लिए साक्षी दृष्टा का स्थिति में रहना होगा तभी देख सकेंगे। साक्षी दृष्टा के स्थिति में रहने से हम हलचल में नही आएंगे। प्रकृति, संबंध, संस्कार के हलचल के आकर्षण में नही आएंगे। दर्द भोगने वाले आत्माओ को शांति और शक्ति की किरणें दे कर मदद दे सकते हैं।  ओम शांति

may you be a karma yogi and finish all karmic bondages with the awareness of your birth of dying alive

Dying alive is the word also used in the outer world. There it means the person is dead because of the sorrows and sufferings but still alive as the soul did not leave the body. According to us dying alive means dying from the outer world and stepping into a beautiful world where God is our companion. We learn to come out of all vices. Dying alive also means that dying from all worldly desires and relations and getting connected to one Baba. When we accept the whole world as one family we don't have attachment with a particular soul and that is the stage we require to help all souls to come out of all vices. Our mind and intellect will no more be wandering towards worldly attractions. Mind will get focussed towards Baba and we become karma yogi and all our karmic bondages ends. So the awareness of birth of dying alive is required to attain such stage. Om shanti

Merciful children of the merciful father

God,our father, the ocean of mercy. We souls, children of Baba , came to this world to act on this stage. But we got involved in this act forgot our original form and the father. We got involved in vices in order to get happiness which is temporary and limited. Half the cycle we souls got entangled in short term happiness and sorrow and as time passed and the cycle almost reached the end happiness almost ended and sorrow reached the peak. We started calling baba and He showered mercy on us and came to this dirty world to rescue us. He freed us from the old world and separated us in a world of spiritual knowledge and remembrance of the Father. He gave us the knowledge of soul and supreme soul and gradually changed our behavior of man filled with vices to gods and goddesses. Baba trained us and is using us as spiritual military .As Baba showered mercy on us and we in turn would shower mercy on those souls who are still under arrest of ravana. We need to follow Baba and help Baba in creat...