निराकारी अवस्था का अटेंशन कम होने के कारण मुख्य विकार देह - अभिमान, काम और क्रोध - इन तीनो का वार समय प्रति समय होते रहता है।
हमारा पहला पाठ निराकारी स्थिति में स्थित होना। यह मासी का घर नही है। बहुत अटेंशन और मेहनत चाहिए। दृढ़ता पूर्वक प्रैक्टिस रखने का सोचते है और झट बुद्धि से फिसल जाती है। 63 जन्मो से इतना बड़ा शरीर को देखते आये है, वर्णन उसी का किया, श्रृंगार उसी का किया , हर कर्म में उसी को यूज़ किया, इतना लगाओ रहा इस शरीर से अब बाबा आकर कहते है तुम तो आत्मा हो एक बिंदु। अब बिंदु बन जाओ। आदत पड़ी हुई है बड़ी चीज़े देखने का। एक तरफ हाथी और साथ मे चींटी। क्या दिखेगा हमे हाथी न। पेपर में नज़र हमारा झट कहा जाता है बड़े बड़े हैडलाइन पर। अक्सर देखा जाता है अखबार वाले हैडलाइन आकर्षित कर देते है पर असलियत जो अंदर छोटे अक्षर में होते है वो है। ठीक वैसे ही बाहर जो इतना बड़ा शरीर दिखता है वो असली नही पर जो निराकार दिखता नही अति शुक्ष्म वो असली है। वही हम है। 63 जन्मो का प्रैक्टिस अब बाबा कहते है उसको भूलो और एक जन्म में आत्मा बन जाओ। तो कितना मेहनत करना है हमे। बाबा कहते धुन लग जाना चाहिए। जब यह प्रैक्टिस होगा, आत्मा का गुण इमर्ज होगा। खुद प्रैक्टिस करने वाले का भी और जिसे आत्मा देखते है उसका भी। रूहानियत का नेचुरल नेचर बन ज...