जो आत्मायें जा नहीं सकती हैं उनको योग से पवित्र बना रहे हैं। इसको कहा जाता है नॉलेज। रूह को नॉलेज मिलती है।
कहते हैं मन में संकल्प विकल्प न आयें। बाप कहते हैं यह तो जरूर आयेंगे। मामेकम् याद करो।
कहते हैं मन में संकल्प विकल्प न आयें। बाप कहते हैं यह तो जरूर आयेंगे। मामेकम् याद करो।
रावण के गले का हार पहले-पहले देवी-देवता धर्म वाले बनते हैं फिर और धर्म वाले आयेंगे, वह भी रावण के गले का हार बनेंगे। अन्त में सभी रावण के गले का हार बन जाते हैं। यह ड्रामा का खेल ऐसा बना हुआ है जो सिवाए बाप के और कोई समझा न सके।
बरोबर हम असुल में अपने बाप के गले की माला हैं फिर बाबा हमको सूर्यवंशी, चन्द्रवंशी बनाते हैं।
दैवीगुण धारण करना कितनी बड़ी सब्जेक्ट है। सारे चक्र का राज़ भी समझाना है। कोई में गुण कम हैं, मुरली अच्छी चलाते हैं। नम्बरवार तो होते ही हैं ना।
जो पास होते हैं वह गले का हार बनते हैं। बाप तो परफेक्ट है, उन जैसा परफेक्ट कोई हो नहीं सकता।
पहला धर्म देवी-देवता है जो बाप स्थापन करते हैं। अब सबसे गिरा हुआ है तो जरूर उनको मदद करेंगे। जब लड़ाई शुरू होगी तो खुद लड़ते भी रहेंगे, मदद भी करते रहेंगे।
अभी ज्ञान रत्नों का धन्धा करना है, रूप-बसन्त बन पढ़ाई पढ़नी और पढ़ानी है।
2- बाप के साथ वापिस घर जाना है, इसलिए पवित्र बनना है। अशरीरी बन, बाप की याद में रह साइलेन्स बल से साइंस पर विजय पानी है।
| वरदान:- | सदा उमंग-उत्साह के पंखों द्वारा उड़ने और उड़ाने वाले मजबूत और अथक भव आप आत्मायें अनेक आत्माओं को उड़ाने के निमित्त हो इसलिए उमंग-उत्साह के पंख मजबूत हों। सदा इसी स्मृति में रहो कि हम ब्राह्मण (बी.के.) विश्व कल्याण के जवाबदार हैं तो आलस्य और अलबेलापन स्वत: समाप्त हो जायेगा। कभी भी थकेंगे नहीं, जिसमें उमंग-उत्साह होता है वह अथक होते हैं। वह अपने चेहरे और चलन से सदा औरों का भी उमंग-उत्साह बढ़ाते हैं। |
| स्लोगन:- | बाप के संग का रंग लगा हुआ हो तो सब बुराईयां सहज ही परिवर्तन हो जायेंगी। |
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