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दिल से दिल तक

1) सिर्फ यह सभा नहीं है लेकिन चारों ओर के स्नेही सहयोगी बच्चों का छोटा सा ब्राह्मण परिवार अति प्यारा और न्यारा परिवार, अलौकिक परिवार, चित्र में होते विचित्र अनोखा परिवार सामने है। 
2) चारों ओर के सर्व बच्चों के स्नेह के, दिल के गीत बाप-दादा ने सुने। 
3) सभी के दिल में आज विशेष प्यार के सागर बापदादा का प्रेम स्वरूप प्रत्यक्ष रूप में नयनों के सामने रहा। 
4) कभी भी अपना स्नेही मूर्त, स्नेह की सीरत, स्नेही व्यवहार, स्नेह के सम्पर्क-सम्बन्ध को छोड़ना मत, भूलना मत। चाहे कोई व्यक्ति, चाहे प्रकृति, चाहे माया कैसा भी विकराल रूप, ज्वाला रूप धारण कर सामने आये लेकिन विकराल ज्वाला रूप को सदा स्नेह के शीतलता द्वारा परिवर्तन करते रहना। 
5) सदा स्नेह की दृष्टि, स्नेह की वृत्ति, स्नेहमयी कृति द्वारा स्नेही सृष्टि बनानी है। 
6) कोई स्नेह नहीं भी दे लेकिन आप मास्टर स्नेह स्वरूप आत्मायें दाता बन रूहानी स्नेह देते चलो।
7) आज की जीव आत्मायें स्नेह अर्थात् सच्चे प्यार की प्यासी हैं। स्नेह की एक घड़ी अर्थात् एक बूँद की प्यासी है। सिवाए सच्चे स्नेह के कारण परेशान हो भटक रहे हैं। सच्चे रूहानी स्नेह को ढूँढ रहे हैं। ऐसी प्यासी आत्माओं को सहारा देने वाले आप मास्टर ज्ञान सागर हो। 
8)यही सच्चा प्यार, मात-पिता का प्यार, रूहानी परिवार का प्यार - इस प्यार की प्राप्ति ने परिवर्तन किया। ज्ञान तो पीछे समझते हो लेकिन पहला आकर्षण सच्चा नि:स्वार्थ पारिवारिक प्यार। 
9)अरब खरब से यह प्यार नहीं मिलता। साइन्स वालों ने देखो कितने भी अल्पकाल के सुख के साधन विश्व को दिये हैं लेकिन जितने बड़े वैज्ञानिक हैं उतना और कुछ खोज करें और कुछ खोज करें इस खोज में ही खोये हुए हैं। सन्तुष्टता की अनुभूति नहीं है, और कुछ करें, और कुछ करें, इसमें ही समय गँवा देते हैं। 
10) नेतायें देखो अपनी कुर्सी सम्भालने में ही लगे हुए हैं। कल क्या होगा इस चिन्ता में लगे हुए हैं। और आप ब्राह्मण सदा परमात्म-प्यार के झूले में झुलते हो। कल का फिक्र नहीं हैं। न कल का फिक्र है, न काल का फिक्र है।
11) जब दिल बड़ी है तो प्यार में कोई भी तकलीफ, तकलीफ नहीं लगती है। बापदादा को बच्चों की तकलीफ भी देखी नहीं जाती। हाँ योग लगाओ तो स्थान तैयार हो जायेगा। 
12) जैसे अभी दिल पर जीत है, दिल को जीता फिर नम्बरवार विश्व के राज्य सिंहासन पर जीत होगी। ऐसे विजयी है ना? 
13) पूर्वज अर्थात् तना होने के कारण डायरेक्ट बीज से कनेक्शन है। 

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