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bhakti mey devi devta ka mahima kyu karte the

Jab atma degrade hone laga puja path shuru kiya kyu ki unko devtao ka smriti tha ki wah bahut unch h aur yeh bhi sense kar paya ki devtao jaise ban nahi sakte aur yeh contrast ka feeling aney karan mahima karne lage. Yeh mahima karna aur puja karna hi ek tarah ka mangne ka rup h .
Checking ab bhi hum mangte to nahi h.
Jab koi apna anubhav sunate h apna devtai transformation ka aur prapti ka tab hum apna learning nahi lekar unka mahima karte h. Kyu ki waha bhi hum weak hone karan wo contrast dikhne karan humme wo learning lene ka shakti nahi hota h ya wo rasta dikhta nahi h. 
Yaha hume samajhna h ki jo anubhav suna rahe h wo uss samay apna devtai gun dharan kiye hue h arthat elevated consciousness h . Isi karan uss atma ko shakti jarurat hi nahi . Wah already shaktishali h balki wah apna anubhav share karke atmao ko elevate kar rahe the. To kya wo elevated atma ek weak soul se shakti leti h jabki wo swayam data ke rup mey h ?
Om Shanti 

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